गोंडा: पूर्व भाजपा सांसद और कैसरगंज से छह बार सांसद रह चुके बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार मामला योगगुरु बाबा रामदेव और पतंजलि से जुड़े विवाद का है। पतंजलि फूड्स लिमिटेड ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ 50 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया है। मामला पतंजलि के घी की गुणवत्ता को लेकर बृजभूषण शरण सिंह की सार्वजनिक टिप्पणियों से जुड़ा है।
मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में हुई है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह ने इस कानूनी कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यदि अदालत उन्हें जेल भेजती है तो वह जमानत नहीं कराएंगे। हालांकि, मानहानि मामले में अंतिम फैसला अदालत की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।
50 करोड़ रुपये का मानहानि मामला क्या है?
रिपोर्टों के अनुसार, विवाद की शुरुआत बृजभूषण शरण सिंह की ओर से पतंजलि के घी और अन्य उत्पादों को लेकर की गई सार्वजनिक टिप्पणियों से हुई। वर्ष 2022 में भी उन्होंने पतंजलि के घी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। बाद में 2026 में भी उन्होंने इसी विषय को लेकर बयान दिए।
पतंजलि फूड्स का आरोप है कि इन सार्वजनिक बयानों से कंपनी की प्रतिष्ठा और ब्रांड इमेज को नुकसान पहुंचा। कंपनी की ओर से यह भी दावा किया गया है कि विवादित टिप्पणियों का कारोबारी प्रभाव पड़ा। इन्हीं दावों के आधार पर 50 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग करते हुए मानहानि का मुकदमा दायर किया गया है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 50 करोड़ रुपये का दावा अभी अदालत में विचाराधीन है। इसे अदालत द्वारा तय किया गया जुर्माना या हर्जाना नहीं माना जा सकता।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पहुंचा मामला
मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, सितंबर 2026 में सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह की ओर से उनके अधिवक्ता अदालत में पेश हुए और जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। मामला इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और सार्वजनिक बयानों से जुड़े दस्तावेजों के कारण भी कानूनी प्रक्रिया में आगे बढ़ रहा है।
अदालत में आगे की सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष अपने-अपने दावों और साक्ष्यों को प्रस्तुत करेंगे। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस मामले का अंतिम परिणाम क्या होगा।
बृजभूषण शरण सिंह ने क्या कहा?
मानहानि मुकदमे के बीच बृजभूषण शरण सिंह ने सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कहा कि यदि उन्हें इस मामले में जेल भेजा जाता है तो वह जमानत नहीं कराएंगे। उन्होंने अपने बयानों को कथित रूप से खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ जागरूकता से जोड़ते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की।
उनकी ओर से लगाए गए उत्पाद संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध स्रोतों से नहीं होती है। इसलिए ऐसे आरोपों को तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि संबंधित व्यक्ति के दावे के रूप में देखना जरूरी है।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
बृजभूषण शरण सिंह और पतंजलि से जुड़ा यह विवाद अचानक सामने नहीं आया है। वर्ष 2022 में उन्होंने सार्वजनिक तौर पर पतंजलि के घी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। उस समय भी उनके बयानों को लेकर विवाद हुआ था।
2026 में उन्होंने एक बार फिर पतंजलि के उत्पादों और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर टिप्पणी की। इसके बाद पतंजलि फूड्स की ओर से कानूनी कार्रवाई की गई और मामला 50 करोड़ रुपये के मानहानि दावे तक पहुंच गया।
क्या पतंजलि के घी पर पहले भी कार्रवाई हुई थी?
इस विवाद के बीच पतंजलि के घी से जुड़े एक अलग पुराने खाद्य सुरक्षा मामले का भी उल्लेख रिपोर्टों में हुआ है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, पिथौरागढ़ में लिए गए एक घी के नमूने की जांच से संबंधित मामला सामने आया था और बाद की कानूनी प्रक्रिया में 2025 में जुर्माने की खबर आई थी।
हालांकि, इस पुराने खाद्य सुरक्षा मामले और बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ चल रहे 50 करोड़ रुपये के मानहानि मामले को एक ही कानूनी मामला समझना सही नहीं होगा। दोनों की प्रकृति और कानूनी आधार अलग हैं।
बृजभूषण शरण सिंह की कितनी संपत्ति है?
50 करोड़ रुपये के मानहानि दावे के बाद सोशल मीडिया और इंटरनेट पर बृजभूषण शरण सिंह की संपत्ति को लेकर भी चर्चा बढ़ी है। उपलब्ध सार्वजनिक चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार, 2019 लोकसभा चुनाव के हलफनामे में उन्होंने अपनी कुल घोषित संपत्ति करीब 9.89 करोड़ रुपये बताई थी। साथ ही करीब 6.15 करोड़ रुपये की देनदारियां भी घोषित की गई थीं।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह आंकड़ा 2019 के चुनावी हलफनामे से संबंधित है। इसे सितंबर 2026 की उनकी वर्तमान संपत्ति या नेटवर्थ नहीं माना जाना चाहिए। MyNeta/ADR के रिकॉर्ड में भी स्पष्ट किया गया है कि यह चुनाव के समय दाखिल किया गया स्व-घोषित हलफनामा है और वर्तमान स्थिति अलग हो सकती है।
हलफनामे में कौन-कौन सी संपत्तियां बताई गई थीं?
2019 के चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार, बृजभूषण शरण सिंह ने चल संपत्ति में बैंक जमा, निवेश, वाहन, आभूषण और अन्य संपत्तियां घोषित की थीं। रिकॉर्ड में उनके नाम पर वाहन और कृषि भूमि सहित कई संपत्तियों का उल्लेख है।
हलफनामे में उनकी चल संपत्ति का घोषित मूल्य करीब 1.39 करोड़ रुपये और अचल संपत्ति का मूल्य करीब 2.44 करोड़ रुपये दर्ज है। रिकॉर्ड में पत्नी की संपत्तियां भी अलग से दर्ज हैं।
इसके अलावा, हलफनामे में बैंक और वित्तीय संस्थानों से जुड़ी देनदारियां भी दर्ज थीं। कुल देनदारियां करीब 6.15 करोड़ रुपये बताई गई थीं।
इसलिए केवल संपत्ति का आंकड़ा देखकर किसी व्यक्ति की वास्तविक आर्थिक स्थिति का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। संपत्ति, देनदारी, बाजार मूल्य और समय के साथ हुए बदलाव अलग-अलग विषय हैं।
छह बार सांसद रह चुके हैं बृजभूषण
बृजभूषण शरण सिंह उत्तर प्रदेश की कैसरगंज लोकसभा सीट से कई बार सांसद रहे हैं। सार्वजनिक रिकॉर्ड के मुताबिक उन्होंने 2004, 2009, 2014 और 2019 में लोकसभा चुनाव जीते थे और इससे पहले भी संसद में उनका प्रतिनिधित्व रहा है। वह भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
उनकी राजनीतिक पहचान उत्तर प्रदेश की राजनीति के साथ-साथ भारतीय कुश्ती प्रशासन से भी जुड़ी रही है।
अभी क्या है मामले की स्थिति?
फिलहाल 50 करोड़ रुपये का मानहानि मामला अदालत में विचाराधीन है। पतंजलि फूड्स ने बृजभूषण शरण सिंह के बयानों को अपनी प्रतिष्ठा और कारोबारी हितों को नुकसान पहुंचाने वाला बताते हुए दावा किया है, जबकि बृजभूषण अपनी टिप्पणियों पर कायम रहने की बात कह रहे हैं।
अदालत में आगे होने वाली सुनवाई के बाद यह स्पष्ट होगा कि दोनों पक्षों के दावों और साक्ष्यों को न्यायालय किस तरह देखता है। जब तक अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं आता, किसी भी पक्ष के दावे को अदालत का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
निष्कर्ष
बाबा रामदेव और बृजभूषण शरण सिंह से जुड़ा विवाद अब 50 करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे तक पहुंच चुका है। यह मामला पतंजलि फूड्स की ओर से बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दायर किया गया है और इसकी जड़ उनके द्वारा पतंजलि के घी की गुणवत्ता को लेकर की गई सार्वजनिक टिप्पणियों में बताई जा रही है।
वहीं, बृजभूषण शरण सिंह की संपत्ति से जुड़े उपलब्ध सार्वजनिक आंकड़े 2019 के चुनावी हलफनामे पर आधारित हैं। उस रिकॉर्ड में उन्होंने करीब 9.89 करोड़ रुपये की संपत्ति और 6.15 करोड़ रुपये की देनदारी घोषित की थी। वर्तमान 2026 की वास्तविक संपत्ति इससे अलग हो सकती है।
अब सभी की नजर अदालत की आगामी सुनवाई और दोनों पक्षों द्वारा पेश किए जाने वाले साक्ष्यों पर है।












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